Rajendra Devray / Tue, Jul 28, 2026 / Post views : 239
सर्वेक्षण हुआ, संरक्षण कब होगा?
पुरातत्व विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज देवरा का प्राचीन शिव मंदिर आज भी उपेक्षित
28 अगस्त 2024 को सर्वेक्षण के बाद भी न चौकीदार नियुक्त हुआ, न स्थायी बोर्ड लगा; परमारकालीन धरोहर के जीर्णोद्धार की मांग तेज
मनावर (निप्र)। नगर से करीब 15 किलोमीटर दूर ग्राम देवरा में स्थित परमारकालीन प्राचीन शिव मंदिर संरक्षण के अभाव में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के इस मंदिर परिसर को पुरातत्व विभाग द्वारा 28 अगस्त 2024 को सर्वेक्षण में शामिल किए जाने के बाद क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि अब इस प्राचीन धरोहर के संरक्षण और जीर्णोद्धार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे, लेकिन करीब दो वर्ष बीतने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुरातत्व विभाग ने इस प्राचीन स्थल का सर्वेक्षण कर लिया है तो फिर इसके संरक्षण की प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ी? मंदिर परिसर में आज तक न कोई चौकीदार नियुक्त किया गया और न ही प्राचीन अवशेषों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस व्यवस्था की गई। विभाग द्वारा लगाया गया फ्लेक्स का सूचना बोर्ड भी समय के साथ फटकर खराब हो चुका है। ऐसे में पुरातत्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कभी भव्यता की पहचान था देवरा का मंदिर
स्थानीय लोगों के अनुसार देवरा का यह प्राचीन शिव मंदिर परमारकालीन है और अपने समय में अत्यंत भव्य एवं वैभवशाली रहा होगा। स्थानीय मान्यता है कि मंदिर का विशाल गुंबद दूर मांडव क्षेत्र से भी दिखाई देता था। क्षेत्र में प्रचलित मान्यता के अनुसार मध्यकाल में राजनीतिक एवं धार्मिक संघर्षों के दौरान मंदिर को भारी नुकसान पहुंचा और कालांतर में यह ध्वस्त हो गया। हालांकि इस संबंध में ऐतिहासिक तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि पुरातत्व विभाग द्वारा किया जाना बाकी है।
कुछ वर्ष पूर्व पुरातत्व विभाग ने मंदिर के मलबे एवं पत्थरों को हटाकर प्राचीन शिवलिंग को बाहर निकाला था। इस दौरान मंदिर के अवशेषों से कई प्राचीन मूर्तियां भी सामने आई थीं। मंदिर परिसर में मौजूद विशालकाय शिवलिंग और जलाधारी आज भी खंडित अवस्था में हैं, जो इस प्राचीन स्थल के गौरवशाली इतिहास की गवाही देते हैं।
संत गजाननजी महाराज ने भी किया था शिवलिंग का अवलोकन
क्षेत्र के श्रद्धालुओं के अनुसार बालीपुर धाम के ब्रह्मलीन संत श्री गजाननजी महाराज ने भी देवरा स्थित प्राचीन शिवलिंग का अवलोकन किया था तथा श्रद्धालुओं को यहां पूजा-अर्चना करने के लिए प्रेरित किया था। इसके बाद से श्रावण मास में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक आस्था के साथ-साथ इस स्थल का पुरातात्विक महत्व भी इसे विशेष बनाता है।
प्रशासन से सवाल—आखिर कब जागेगा विभाग?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि पुरातत्व विभाग के पास इस ऐतिहासिक स्थल का सर्वेक्षण करने के लिए समय और संसाधन हैं तो फिर संरक्षण एवं सुरक्षा की व्यवस्था करने में इतनी देरी क्यों हो रही है? मंदिर परिसर में स्थायी सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। पुराना फ्लेक्स फट चुका है और प्राचीन धरोहर खुले में पड़ी हुई है।
लोगों ने मांग की है कि शासन और पुरातत्व विभाग तत्काल मंदिर परिसर में स्थायी सूचना बोर्ड लगाए, सुरक्षा के लिए चौकीदार नियुक्त करे तथा प्राचीन मूर्तियों एवं अवशेषों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था करे। इसके साथ ही विशेषज्ञों की देखरेख में मंदिर के शेष अवशेषों का वैज्ञानिक अध्ययन कर संरक्षण एवं जीर्णोद्धार की कार्ययोजना तैयार की जाए।
भाजपा सरकार से क्षेत्रवासियों को उम्मीद
क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रदेश में भाजपा सरकार के रहते मनावर क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर के संरक्षण के लिए विशेष पहल होनी चाहिए। यदि देवरा के प्राचीन शिव मंदिर का विधिवत संरक्षण और विकास किया जाता है तो इसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान मजबूत होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 28 अगस्त 2024 को सर्वेक्षण में शामिल किए गए देवरा के प्राचीन शिव मंदिर को वास्तविक संरक्षण कब मिलेगा? क्या पुरातत्व विभाग केवल सर्वेक्षण तक सीमित रहेगा या इस ऐतिहासिक धरोहर के जीर्णोद्धार और सुरक्षा के लिए धरातल पर भी कोई ठोस कार्रवाई करेगा? क्षेत्रवासियों की निगाहें अब शासन और पुरातत्व विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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