Rajendra Devray / Sat, Sep 6, 2025 / Post views : 295




बड़वानी(निप्र) आज ना तो पुरुषों को और ना ही महिला को मर्यादा है इंद्रियों के वशीभूत हो कर हम सभी अपने जीवन ,यौवन को काम वासना की भट्टी में झौंक रहे है। समय रहते समय को जान लीजिए सदा संतोष व्रत का पालन करोगे तो देवता भी रक्षा करने आते है ,उपरोक्त उदगार स्थानीय दिगंबर जैन मंदिर में बड़वानी में विराजित राष्ट्र संत गणाचार्य विराग सागर जी महाराज की शिष्या श्रमणि विदुषी आर्यिका मां विकुंदन श्री माताजी ने धर्म सभा में बताया ,आगे राजा विजय और रानी विजया का दृष्टांत बताते हुए कहा कि कैसे दोनों ने अलग अलग पक्षों का ब्रह्मचर्य का नियम ले लिया था और जब दोनों ने एक दूसरे को बताया तो उन दोनों ने बहुत विशुद्ध पूर्वक उसे निभाया भी । माताजी ने बताया कि अपने अपने जीवन का कालशारोहण कर लेना और अपने शील वृत्त का पालन कर लेना। जिसके पास शील नहीं है उसके पास कुछ नहीं है आपके पास मर्यादा होना चाहिए यदि मर्यादा नहीं है तो ना परिवार बचेगा और ना संस्कृति बचेगी तप ,त्याग की वजह से हमारे भोग में शिथिलता आती है और उसी से आकिंचन्य को धारण कर उत्तम ब्रह्मचर्य को पालन कर लेते है जिनका भी ब्रह्मचर्य का व्रत नहीं है वो ब्रह्मचर्य व्रत के अनुसार बंधे और पालन कर अपना जीवन सफल बनाए ।
आज प्रातः भगवान के अभिषेक,शांतिधारा, आरती नित्य नियम पूजन संपन्न हुई दोपहर में भगवान की शोभायात्रा नगर के मुख्य मार्ग से निकाल कर पुनः जैन मंदिर में अभिषेक,शांतिधारा,आरती के बाद समाप्त हुई दस लक्षण जी की माल की बोली का सौभाग्य सुरेश चंद जी काला परिवार को प्राप्त हुआ और भगवान की शांतिधारा का सौभाग्य गौरव ओम प्रकाश काला को प्राप्त हुआ ,शाम को भगवान की आरती और माला वाले परिवार का बहुमान किया गया
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