।समारोह में बड़ी संख्या में क्षेत्र के गो भक्त शामिल हुए। जिसमें मातृ शक्ति की उपस्थिति सबसे ज्यादा थी। गो भक्तों ने गोमाता को गेंहू की मीठी दलिया का प्रसाद अर्पित किया। इस अवसर पर कवि राम परिंदा ने गो शब्द की वैदिक व्याख्या करते हुए कहा कि गो शब्द का एक अर्थ इन्द्रिय भी होता है। अतः मानव को अपनी समस्त इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए, तभी हम प्रकृति को सही रूप में समझ सकेंगे । उन्होंने अपनी व्यंग्य रचना का पाठ करते हुए कहा कि अब अधर्म से भारत भूमि नहीं फटने देंगे,कसम राम की खाते हैं,अब गाय नहीं कटने देंगे । ज्योतिषी डॉ कविता शर्मा ने गोपाष्टमी पर्व के आरंभ होने की कथा सुनाई । गायत्री मंदिर के पुजारी महेश राठौड़ ने गो माता और विश्वरथ की कथा सुनाई । हनुमान भक्त देवा बाबा भी मंचासीन थे । गोशाला में प्रातः प्रारम्भ हुए हवन में उपस्थित गो भक्तों ने आहुतियां भी डाली। पंडित प्रकाश खोड़े ने हवन पूजन सम्पन्न कराया। ग्रामवासियों की उपस्थिति में गो माता की पूजा आरती कर उन्हें थूली का भोग लगाया । कार्यक्रम के अंत में समस्त गो भक्तों को भंडारे में दाल,चावल,थूली और कढ़ी का भोज करा कर तुलादान भी किया गया। समारोह में सिंघाना के उप सरपंच संदीप अग्रवाल,सत्यनारायण पाटीदार , रेणुका सचीन गंगाजलिया,चिन्मय रूपम राठौड़ ,तेजू बाई रामा,त्रिभुवन भायल,शिखा भायल , अर्निका यशवंत,मयंक राजेश पाटीदार ,पंकज बर्फा ,गौरव राठी आदि उपस्थित थे।