ब्यूरो चीफ अनिल जटिया
जहां पर भक्तों को राजराजेश्वरी जोगमाया मसान वाली महाकाली दिन में देती है तीन रूपों में दर्शनप्रतापगढ़ के मुक्तिधाम स्थित दादा भैरवनाथ के स्थान के समीप बन रहे माता जी के मंदिर पर भक्तों को दे रही है तीन रूप में दर्शन जहां पर भक्ति अपनी मानता लेकर आते हैं और पूर्ण होने पर मातेश्वरी को श्रद्धा अनुसार फल फूल वे माला हार चढ़ाकर पूजा करते हैं कई भक्तों की मान्यता यह है की मातेश्वरी कितने वर्षों से जमीन के अंदर विराजमान थी और लोगों को यह भी मालूम नहीं था की मुक्तिधाम के अंदर जोगमाया मसान वाली महाकाल का का भी स्थान है जब कई भक्तों से पूछा गया तो भक्तों ने बताया कि हमें काफी वर्षों से भैरव दादा के स्थान पर आते हैं पर मातेश्वरी के बारे में हमें भी मालूम नहीं था और नहीं हमने कभी स्थान को देखा था भैरव दादा के पुजारी ने बताया कि यहां पर मातेश्वरी काफी वर्षों से विराजमान थी तेज धूप के अंदर तप रही थी वह बारिश में भीग रही थी वह भक्तों को मालूम नहीं होने पर स्थान के ऊपर से भी भक्त निकल जाया करते थे और यह स्थान जमीन के अंदर दबा हुआ था जब बारिश का पानी आ जाया करता था तो यह किसी को नजर भी नहीं आया करता था मातेश्वरी ने एक भक्त जो 10 वर्षों से मातेश्वरी की सेवा कर रहा था एक दिन उस सज्जन को दर्शन दिया और कहा कि अब मेरा आप मंदिर बनवाओ और मुझे ऊपर स्थापित करो भैरव दादा के सभी भक्तों ने वह नव शक्ति गरबा पैनल के सभी भक्तों ने मिलकर मातेश्वरी को देव अमावस पर जमीन से निकलकर ऊपर विराजमान किया और मंदिर निर्माण कार्य शुरू हो गया और कहा कि यहां पर जो भी अपनी मनोकामना लेकर आता है वह सभी पूर्ण होती हैं वह सभी के कार्य सिद्ध होते हैं और यह मूर्ति है जो प्राचीन समय की है जो दिन में तीन रूप बदल रही है और सभी भक्तों को अलग-अलग रूप में दर्शन दे रही है और जो भक्त यहां पर अपने कार्य के लिए आते हैं वह सभी कार्य सफल हो रहे हैं