Fri, 06 Nov 2026
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: अंजड़ तहसील के ग्राम मंडवाड़ा के प्रगतिशील कृषक श्री बाबूलाल काग आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं प्राकृतिक खेती और इंटरक्रॉपिंग के माध्यम से उन्होंने न केवल कृषि की लागत को कम किया है बल्कि लाभकारी बनाया

अंजड़ तहसील के ग्राम मंडवाड़ा के प्रगतिशील कृषक श्री बाबूलाल काग आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं प्राकृतिक खेती और इंटरक्रॉपिंग के माध्यम से उन्होंने न केवल कृषि की लागत को कम किया है बल्कि लाभकारी बनाया
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// सफ़लता की कहानी// अंजड़ के कृषक श्री बाबूलाल काग ने प्राकृतिक खेती और इंटरक्रॉपिंग से पेश की मिसाल खेती को बनया लाभकारी  ---‐--- 50 से अधिक गोवंश अपशिष्ट और आधुनिक तकनीक के संगम से किया कृषि की लागत को कम बड़वानी 28 फरवरी 2026/बड़वानी जिले की अंजड़ तहसील के ग्राम मंडवाड़ा के प्रगतिशील कृषक श्री बाबूलाल काग आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। प्राकृतिक खेती और इंटरक्रॉपिंग के माध्यम से उन्होंने न केवल कृषि की लागत को कम किया है,परन्तु प्रकृति के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। रसायन से प्राकृतिक खेती तक का सफर श्री काग पूर्व में रसायन आधारित खेती करते थे।अच्छी उपज होने के बावजूद, रसायनों और उर्वरकों पर होने वाला खर्च उनकी शुद्ध आय को कम कर देता था। उद्यानिकी एवं कृषि विभाग के सौजन्य से प्राप्त प्रशिक्षण उपरांत उन्होने प्राकृतिक खेती की पद्धतियों को जाना एवं अपनाया, जिसके सकारात्मक परिणाम अब उन्हें प्राप्त हो रहे हैं। श्री काग के पास वर्तमान में 50 से 55 गोवंश हैं। खेती में खाद के लिए वे पूरी तरह गोवंश के अपशिष्ट पर आत्मनिर्भर हैं गोवंश के गोबर-मूत्र और बायोगैस की स्लरी अपशिष्ट को एक बड़े हॉज़ (टैंक) में एकत्रित किया जाता है। उन्होंने इस खाद को खेत तक पहुँचाने के लिए सेंसर युक्त मड पंप का उपयोग किया है, जिससे पूरे खेत में प्राकृतिक खाद का समान रूप से छिड़काव सुनिश्चित होता है। इंटरक्रॉपिंग के माध्यम से एक साथ ले पा रहे हैं कई फसलों का लाभ सिर्फ एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय, श्री काग ने खेत के हर इंच का बुद्धिमत्ता से उपयोग किया है। वे गेहूं और केला के साथ-साथ आम, हल्दी, पपीता और तरबूज इसके साथ ही बागवानी के अंतर्गत सब्जियों की खेती इंटरक्रॉपिंग के माध्यम से कर रहे हैं। उन्होंने आम की विशेष किस्मों जैसे केसरी और तोता परी को भी इंटरक्रॉपिंग मॉडल में शामिल किया है।श्री बाबूलाल काग के अनुसार ष्प्राकृतिक खेती न केवल हमारी मिट्टी को जीवित रखती है, बल्कि यह किसान को बाजार के महंगे खाद-बीज के कर्ज से भी मुक्त करती है। श्री बाबूलाल काग की यह सफलता की कहानी यह सिद्ध करती है कि यदि आधुनिक तकनीक और प्राचीन प्राकृतिक पद्धतियों का सही मेल हो, तो खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला क्षेत्र बन सकती है।

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