Rajendra Devray / Wed, Sep 3, 2025 / Post views : 291



[caption id="attachment_20712" align="alignnone" width="300"]
0-0x0-0-0#[/caption]
[caption id="attachment_20713" align="alignnone" width="300"]
0-0x0-0-0#[/caption]
[caption id="attachment_20714" align="alignnone" width="300"]
0-0x0-0-0#[/caption]
अंजड:- डोल ग्यारस पर्व पर नगर के श्याम कॉलोनी स्थित श्री खाटूश्याम मन्दिर में हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा।
दोपहर 4 बजे तक करीब 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओ ने मन्दिर पहुँचकर श्याम बाबा के दर्शन लाभ लिए व देर रात्रि तक करीब 15 हजार भक्तों के पहुँचने की सम्भावनाए है।
बुधवार डोल ग्यारस पर्व पर सुबह 6 बजे श्रद्धालुओ के आने का सिलसिला शुरू हो गया था जो देर रात्रि तक जारी रहा।
सुबह से ही बड़ी संख्या में आस-पास के ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों से श्रद्धालुजन निशान यात्रा लेकर भी पहुँचे तथा श्याम बाबा को निशान अर्पित किए।
नांगलवाड़ी से 15 महिलाएं 55 किलोमीटर पैदल चलकर 12 घण्टे में निशान लेकर श्याम मन्दिर पहुँची।
महिला श्रद्धालुओ द्वारा मन्दिर प्रांगण में भजन कीर्तन के साथ जमकर थिरकी तथा हजारों मन्नतधारियो ने अर्जी के नारियल बांधे तो सैकड़ो भक्त अपनी अर्जी पूरी होने पर नारियल खोलते भी नजर आए उक्त सिलसिला दिनभर चलता रहा।
बाबा का किया मनमोहक श्रंगार:-
सुबह 6 बजे से पण्डित प्रशांत शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्याम बाबा व मन्दिर में स्थापित पशुपतिनाथ महादेव, श्री सलासलर बालाजी, श्रीराम व श्री कृष्ण दरबार का पूजन अर्चन किया तथा सेवादारो द्वारा श्याम बाबा एवं स्थापित सभी देवी देवताओं का दिल्ली से बुलवाए विभिन्न प्रजातियों के फूलों से आकर्षक श्रंगार किया तथा सुंदर कसीदाकारी से युक्त श्याम बाबा को बागा पहनाया तथा कानो में व सर पर स्वर्ण रंग व रत्नजड़ित कुंडल व मुकुट से सुशोभित किया गया तथा पूरे मन्दिर परिसर को आकर्षक फूलों से सजाया गया।
नांगलवाड़ी से 15 महिलाओं का जत्था पहुचा:-
डोल ग्यारस पर नांगलवाड़ी से करीब 15 महिलाएं व युवतियां निशान यात्रा लेकर मन्दिर पहुँची। नांगलवाड़ी से आई पायल गहलोत ने बताया कि करीब 15 महिला सदस्यों का जत्था अलसुबह 3 बजे से नांगलवाड़ी से पैदल निशान लेकर रवाना हुए थे जो करीब 55 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर 13 घण्टे में शाम 4 बजे अंजड मन्दिर पहुँचे।
उन्होंने बताया कि यह हमारी तीसरी निशान यात्रा है तथा आगे भी हम निशान यात्रा जारी रखेंगे।
मन्दिर पहुचने पर श्याम मन्दिर ट्रस्ट द्वारा उनका स्वागत कर उन्हें स्वल्पहार करवाया गया।
सजाया भव्य दरबार:-
सुबह 11 बजे व रात्रि 8:30 बजे श्याम बाबा को भोग लगाकर भोग आरती की गई तथा शाम 7 बजे हाजरो श्रद्धालुओ की उपस्थिति में संगीतमय महाआरती कर श्याम बाबा का आकर्षक डोले में भव्य व दिव्य दरबार सजाया तथा ज्योत प्रज्वलित की गई जिसमें हजारों भक्तों ने गाय के घी व सूखे खोपरे की आहुतियां प्रदान कर बाबा का आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर श्याम एकदशी प्रसादी समिति द्वारा फलाहारी मिक्चर, विभिन्न प्रकार के मिष्ठान्नों व फलों की प्रसादी वितररित की गई।
डोल ग्यारस का महत्व:-
पण्डित प्रशांत शर्मा ने बताया कि डोल ग्यारस भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है, और इसे परिवर्तिनी एकादशी, जलझूलनी या पद्मा एकादशी भी कहा जाता है। यह एकादशी भगवान विष्णु के करवट बदलने, माँ यशोदा द्वारा कृष्ण के वस्त्र धोने और श्री कृष्ण के बाल रूप की पालकी यात्रा (जल विहार) से संबंधित है। इस व्रत को करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है, सुख-सौभाग्य बढ़ता है और वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
मुख्य कारण:
भगवान विष्णु का करवट लेना:
धार्मिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास के दौरान योग निद्रा में भगवान विष्णु इसी दिन करवट लेते हैं। इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं।
माँ यशोदा द्वारा कृष्ण के वस्त्र धोना:
एक और प्रचलित मान्यता के अनुसार, इस दिन माता यशोदा ने भगवान श्रीकृष्ण के वस्त्रों को नदी के जल में धोया था। इसी कारण इसका नाम जलझूलनी एकादशी पड़ा है।
जल विहार और शोभा यात्रा:
मंदिरों में इस दिन भगवान के विग्रहों को पालकी (डोले) में बिठाकर शोभा यात्रा निकाली जाती है, जिसमें मूर्तियों को झुलाया जाता है। यह जल विहार के समान होता है, जिसके कारण इसे डोल ग्यारस व पद्म एकादशी भी नाम मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन