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राजेंद्र देवराय प्रधान संपादक : अंजड़ भगवान श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, में सहेजी हुई हैं प्राचीन ज्ञान की धरोहर

Rajendra Devray

Rajendra Devray / Sun, Jun 21, 2026 / Post views : 236

अंजड़ भगवान श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, में सहेजी हुई हैं प्राचीन ज्ञान की धरोहर
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अंजड़ भगवान श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, में सहेजी हुई हैं प्राचीन ज्ञान की धरोहर

प्राकृत, संस्कृत, हिन्दी, तमिल भाषाओं में कागज़ और ताम्रपत्र पर अंकित है ज्ञान संपदा

बड़वानी 21 जून 2026/भारत को विश्व में विशिष्ट पहचान दिलाने वाली उसकी प्राचीन ज्ञान परम्परा आज भी अनेक मंदिरों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में सुरक्षित पांडुलिपियों के रूप में जीवित है।

अंजड़ भगवान श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, में सहेजी हुई हैं प्राचीन ज्ञान की धरोहर

इसी अमूल्य धरोहर की खोज, पहचान, सूचीकरण और संरक्षण के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा ज्ञान भारतम् अभियान संचालित किया जा रहा है। बड़वानी जिले में कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह के नेतृत्व तथा नोडल अधिकारी डिप्टी कलेक्टर श्री शक्तिसिंह चौहान के मार्गदर्शन में गठित समिति इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

इसी क्रम में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं एवं जिला स्तरीय ज्ञान भारतम् समिति के सदस्यों ने अंजड़ स्थित भगवान श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर को विजिट किया।

चार भाषाओं में सुरक्षित है ज्ञान-संपदा

मंदिर समिति के श्री धर्मेन्द्र जैन, श्री जुगलकिशोर पाटनी, श्री सुरेशचन्द्र जैन तथा श्री सुशील कुमार जैन ने समिति सदस्यों डॉ. अंतिम मौर्य एवं डॉ. मधुसूदन चौबे को पांडुलिपियों का अवलोकन करवाते हुए बताया कि मंदिर में वर्तमान में 78 पांडुलिपियाँ सुरक्षित हैं।

इनमें प्राकृत, संस्कृत, हिन्दी तथा तमिल भाषाओं में लिखित दुर्लभ ग्रंथ सम्मिलित हैं। विशेष बात यह है कि इनमें कागज के साथ-साथ ताम्रपत्रों पर अंकित अभिलेख भी सुरक्षित हैं, जो उनके ऐतिहासिक महत्व को और अधिक बढ़ाते हैं। इन पांडुलिपियों में भगवती आराधना, चन्द्रप्रभ काव्य, महापद्म पुराण, रत्नकरण्ड श्रावकाचार, पुण्याश्रव कथाकोष, दशलक्षण पूजा, राखी कथा, चौबीस तीर्थंकर पूजा, प्रश्नमाला, सोलह कारण भावना, धर्मसार, श्रीपाल चरित्र, सुकमाल चरित्र, नवग्रह पूजा, हनुमान चरित्र, पांडव पुराण, अमितगति श्रावकाचार, मिथ्याखंडन तथा जम्बू चरित्र जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ सुरक्षित हैं।

क्या है इन ग्रंथों की विषयवस्तु

श्री धर्मेन्द्र जैन ने बताया कि इन पांडुलिपियों में मुख्य रूप से जैन दर्शन, धर्म, आध्यात्मिक साधना, नैतिक शिक्षा, आचारशास्त्र, चरित्र साहित्य, पुराण, पूजा-विधान तथा मोक्षमार्ग से संबंधित ज्ञान सुरक्षित है। इनमें तीर्थंकरों, आचार्यों और आदर्श श्रावकों के जीवन चरित्र, गृहस्थ जीवन के कर्तव्य, सदाचार, तप, संयम, अहिंसा, आत्मकल्याण तथा धर्म पालन की शिक्षाएँ वर्णित हैं। कुछ ग्रंथों में रामायण और महाभारत की कथाओं का जैन दृष्टिकोण से प्रस्तुतीकरण भी मिलता है। इन पांडुलिपियों के माध्यम से तत्कालीन समाज, संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं, साहित्यिक परंपराओं और भारतीय ज्ञान-संपदा के विविध आयामों की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।

महिलाओं ने सहेज रखी है ज्ञान की विरासत

इन पांडुलिपियों के संरक्षण में समाज के महिला मंडल की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। श्रीमती सपना जैन, श्रीमती सरोज पाटनी, श्रीमती मीना जैन, श्रीमती कल्पना जैन सहित समाज की महिलाएँ नियमित रूप से इन ग्रंथों की देखभाल, सफाई और संरक्षण का कार्य करती हैं। उनकी सतत सजगता और श्रद्धा के कारण यह ज्ञान-संपदा आज भी सुरक्षित अवस्था में उपलब्ध है।

क्यों महत्वपूर्ण हैं पांडुलिपियाँ

डॉ. अंतिम मौर्य और डॉ. मधुसूदन चौबे ने बताया कि पांडुलिपियाँ केवल पुराने ग्रंथ नहीं होतीं, बल्कि वे अपने समय के ज्ञान, भाषा, साहित्य, समाज, धर्म, शिक्षा और संस्कृति के जीवंत दस्तावेज होती हैं। मुद्रण कला के व्यापक प्रसार से पहले समस्त ज्ञान हस्तलिखित रूप में सुरक्षित किया जाता था। इसलिए प्रत्येक पांडुलिपि अपने आप में एक ऐतिहासिक स्रोत है। इनके अध्ययन से न केवल प्राचीन विचारों और परम्पराओं की जानकारी मिलती है, बल्कि स्थानीय इतिहास और भारतीय ज्ञान परम्परा के अनेक अज्ञात पक्ष भी प्रकाश में आते हैं।

सफलता की ओर बढ़ रहा ज्ञान भारतम् अभियान

उल्लेखनीय है कि बड़वानी जिले में संचालित ज्ञान भारतम् अभियान निरंतर सफलता प्राप्त कर रहा है। अब तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त पांडुलिपियों में से 42 पांडुलिपियाँ स्वीकृत होकर भारत सरकार के ज्ञान भारतम् पोर्टल पर सूचीबद्ध हो चुकी हैं।

यह कार्य नोडल अधिकारी डिप्टी कलेक्टर श्री शक्तिसिंह चौहान, इतिहासकार डॉ. शिवनारायण यादव, डॉ. पुष्पलता खरे, डॉ. मंगला ठाकुर तथा प्राचार्य डॉ. वीणा सत्य के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रहा है। विषय विशेषज्ञ के रूप में इंदौर के श्री अनिल जोशी तथा पुरातत्व विभाग भोपाल के श्री अमन असवाल एवं सुश्री पूजा शर्मा का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। करियर सेल के कार्यकर्ता भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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