Rajendra Devray / Mon, Jun 15, 2026 / Post views : 201
ओंकारेश्वर चतुर्थ चरण नहर में अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचने पर किसानों ने उठाई आवाज
मनावर। ओंकारेश्वर परियोजना चतुर्थ चरण अंतर्गत नहर के अंतिम छोर तक पर्याप्त मात्रा में सिंचाई जल नहीं पहुंचने की समस्या को लेकर किसानों ने शासन एवं नर्मदा घाटी विकास विभाग के समक्ष विस्तृत मांग-पत्र प्रस्तुत किया है। किसानों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित परियोजना का लाभ पिछले 4-5 वर्षों से अंतिम छोर के किसानों को नहीं मिल पा रहा है, जिससे कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार धार जिले के चार विकासखंडों के 119 गांवों की लगभग 29,947 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करीब 349.30 करोड़ रुपये की लागत से ओंकारेश्वर चतुर्थ चरण परियोजना का निर्माण किया गया था। किसानों का आरोप है कि चतुर्थ चरण नहर समूह-2 की संस्था क्रमांक 15 से 29 तक के अंतिम छोर पर कई वर्षों से पर्याप्त जल आपूर्ति नहीं हो रही है, जिससे परियोजना का मूल उद्देश्य अधूरा रह गया है।
51 किलोमीटर बिंदु पर तय मात्रा में पानी देने की मांग

किसानों ने मांग की है कि ग्रुप-2 के 51 किलोमीटर बिंदु पर निर्धारित 8.50 क्यूमेक्स जल आपूर्ति आज तक नहीं हो रही है। उनका सुझाव है कि धरमपुरी क्षेत्र के पास गंगाजली तालाब में एक नया जल आपूर्ति प्रोजेक्ट विकसित कर सिसिलिया तालाब मॉडल की तर्ज पर अतिरिक्त जल उपलब्ध कराया जाए, जिससे नहर में निर्धारित मात्रा में पानी पहुंच सके।
जीआरपी और आरसीसी पाइप बदलने की मांग
किसानों ने बताया कि नहर की मुख्य पाइपलाइन में पूर्व में लगाए गए जीआरपी (GRP) एवं आरसीसी (RCC) पाइप कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, जिससे पानी का रिसाव बढ़ रहा है और जल की बड़ी मात्रा व्यर्थ हो रही है। उन्होंने इन पाइपों को बदलकर एमएस (MS) पाइप लगाने की मांग की है। किसानों ने यह भी उल्लेख किया कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2022 में जारी निर्देशों के अनुसार नई परियोजनाओं में जीआरपी पाइप के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
वाटर ड्यूटी में सुधार और अतिरिक्त जल आपूर्ति का सुझाव
ज्ञापन में कहा गया है कि चतुर्थ चरण परियोजना के निर्माण के समय वाटर ड्यूटी 0.27 निर्धारित की गई थी, जबकि वर्तमान में नई परियोजनाओं में 0.32 वाटर ड्यूटी रखी जा रही है। किसानों का मानना है कि यही कारण है कि नहर के अंतिम सिरे तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने आरडी-68 या आरडी-78 पर ओवरहेड टेक के माध्यम से नर्मदा नदी से अतिरिक्त 6 क्यूमेक्स जल मुख्य नहर में छोड़े जाने की मांग की है।
विभागीय अधिकारियों को भेजा गया प्रतिवेदन
किसानों ने मांग की है कि नर्मदा घाटी विकास विभाग के संबंधित अधिकारियों से विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करवाकर समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि अंतिम छोर के किसानों को समय पर सिंचाई जल उपलब्ध कराना आवश्यक है, जिससे कृषि उत्पादन बढ़े और राज्य सरकार के कृषि कल्याण संबंधी उद्देश्यों को सफलता मिल सके।
इस संबंध में ज्ञापन की प्रतियां नर्मदा घाटी विकास विभाग के उपाध्यक्ष, अभियंता प्रमुख, मुख्य अभियंता निचली नर्मदा परियोजना इंदौर, अधीक्षण यंत्री नर्मदा विकास मंडल धार तथा संबंधित कार्यपालन यंत्री को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं।
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