Rajendra Devray / Fri, Jul 24, 2026 / Post views : 241
दो माह से वेतन नहीं मिला तो नर्मदा फिल्टर प्लांट पर कर्मचारियों का फूटा गुस्सा
12 घंटे ड्यूटी के बदले 10 हजार रुपए वेतन का आरोप, पीएफ और ओवरटाइम भुगतान को लेकर भी उठे सवाल; गेट बंद कर काम रोका
मनावर। धार जिले के हजारों परिवारों को नर्मदा नदी का शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम वायल में निर्माणाधीन अपर नर्मदा फिल्टर प्लांट पर बुधवार सुबह उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब दो माह से वेतन नहीं मिलने से नाराज सिक्योरिटी गार्डों और अन्य कर्मचारियों ने मुख्य गेट बंद कर काम रोक दिया। कर्मचारियों ने ठेका कंपनी के खिलाफ जमकर नाराजगी जताते हुए बकाया वेतन का तत्काल भुगतान करने की मांग की।

कर्मचारियों का आरोप है कि उनसे लगातार 12 घंटे तक ड्यूटी कराई जा रही है, लेकिन इसके बदले उन्हें महज करीब 10 हजार रुपए मासिक वेतन दिया जा रहा है। कर्मचारियों के अनुसार, अतिरिक्त समय तक काम कराने के बावजूद ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता। वहीं, वेतन से पीएफ की कटौती की जा रही है या नहीं और यदि कटौती हो रही है तो उसका रिकॉर्ड क्या है, इसकी भी उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।
वेतन के लिए गेट पर बैठे कर्मचारी
बुधवार सुबह कर्मचारियों ने वेतन नहीं मिलने के विरोध में फिल्टर प्लांट का मुख्य गेट बंद कर दिया। इससे निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारी और अन्य कर्मचारी काफी देर तक प्लांट के बाहर खड़े रहे। कर्मचारियों का कहना था कि जब तक दो माह का बकाया वेतन नहीं दिया जाता, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वेतन भुगतान को लेकर ठेका कंपनी के अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन दिया गया। लगातार दो माह तक वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों के सामने परिवार चलाने और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है।
'भुगतान डीएफएस कंपनी को होता है, कर्मचारियों के वेतन की जानकारी नहीं'
मामले में डीआरएआईपीएल कंपनी के एचआर विभाग के शुभम दुबे ने बताया कि उनकी कंपनी का अनुबंध डीएफएस फैसिलिटीज कंपनी से है और भुगतान भी संबंधित कंपनी को किया जाता है। कर्मचारियों को कितना वेतन दिया जा रहा है तथा पीएफ की कटौती हो रही है या नहीं, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है और संबंधित कंपनी से चर्चा कर समस्या का समाधान कराया जाएगा।
श्रम विभाग और पीएफ विभाग की भूमिका पर भी सवाल
सिक्योरिटी गार्ड लोकेश काग ने बताया कि कर्मचारियों से 12 घंटे की ड्यूटी ली जाती है, लेकिन अतिरिक्त समय के काम का भुगतान नहीं किया जाता। कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि इतने बड़े सरकारी प्रोजेक्ट पर लंबे समय से कर्मचारी काम कर रहे हैं, इसके बावजूद श्रम विभाग और पीएफ विभाग द्वारा कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं और श्रम कानूनों के पालन की जांच के लिए निरीक्षण किया गया या नहीं।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दो माह का बकाया वेतन नहीं दिया गया और 12 घंटे की ड्यूटी, ओवरटाइम भुगतान तथा पीएफ सहित अन्य श्रम सुविधाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग और संबंधित ठेका कंपनी कर्मचारियों की शिकायत पर कब तक कार्रवाई करती है।
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